अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहने वालीं बहराइच से सांसद सावित्री बाई फुले ने गुरुवार को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने इस मौके पर भाजपा पर भी निशाना साधा। फुले ने कहा कि भाजपा दलित और पिछड़ा विरोधी है।
गुरुवार को लखनऊ में बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि के मौके पर फुले ने कहा कि भाजपा दलितों के साथ-साथ पिछड़ा और मुस्लिम विरोधी है। सरकार आरक्षण खत्म करने की साजिश रच रही है और देश को मनुस्मृति से चलाना चाहती है।
संविधान बदलने की कोशिश कर रही भाजपा- फुले
उन्होंने कहा- दलित सांसद होने की वजह से मेरी बातों को अनसुना किया गया। संविधान खत्म करने की साजिश के साथ ही दलित, पिछड़ों का आरक्षण बड़ी बारीकी से समाप्त किया जा रहा है।
' मनुवादियों के खिलाफ थे हनुमानजी'
सावित्री ने कहा- मुख्यमंत्री योगी ने हनुमानजी को दलित बताया है। हनुमानजी दलित थे, लेकिन मनुवादियों के खिलाफ थे। हनुमानजी दलित थे, इसलिए राम ने उन्हें बंदर बना दिया। दलितों को मंदिर नहीं, संविधान चाहिए। 23 दिसंबर को रमाबाई मैदान में महारैली करूंगी। मैं सांसद हूं, जब तक कार्यकाल है, सांसद ही रहूंगी। मैं संविधान को पूरी तरह से पालन करूंगी।"
केसीआर मुख्यमंत्री बनें, इसलिए युवक ने लगाई थी फांसी
19 नवंबर को हैदराबाद के टी गुरुवप्पा (42) ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। वह के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) की पार्टी टीआरएस का कार्यकर्ता था। उसने सुसाइड नोट में केसीआर को दोबारा मुख्यमंत्री बनाने और इलाके के विधायक विवेकानंद को जिताने की अपील की थी। गुरुवप्पा ने तेलंगाना राज्य के लिए हुए प्रदर्शन में भी जान देने की कोशिश की थी।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री और टीआरएस पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर राव दूसरी बार सत्ता में आने के लिए महायज्ञ करवा रहे हैं। यह दो दिनी यज्ञ रविवार को सिद्दिपेट जिले के एर्रावली स्थित राव के घर पर शुरू हुआ। सोमवार को यह राज श्यामला महायज्ञ पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगा। इसमें राव के साथ उनकी पत्नी शोभा और पूरी कैबिनेट जुटी है।
इस यज्ञ विशाखा के शारदापीठाधिपति स्वरूपनादेंद्र सरस्वती करवा रहे हैं। उन्होंने इसके लिए अलग-अलग राज्यों से 75 पंडितों को भी बुलाया है। यज्ञ के बाद चंद्रशेखर राज्य में चुनावी प्रचार शुरू करेंगे। तेलंगाना में 7 दिसंबर को वोट डाले जाएंगे। परिणाम 11 दिसंबर को आएंगे।
Thursday, December 6, 2018
Thursday, November 29, 2018
इकोनॉमी के लिए तगड़ा झटका साबित हुई नोटबंदी, ग्रोथ थमी: अरविंद सुब्रह्मण्यन
मोदी सरकार में आर्थिक सलाहकार की भूमिका निभा चुके अरविंद सुब्रह्मण्यन ने नोटबंदी को एक बड़ा झटका करार दिया. उन्होंने कहा, ''नोटबंदी इकोनॉमी के लिए एक खतरनाक और तगड़ा झटका था. इससे अर्थव्यवस्था के विकास की रफ्तार तेजी से गिरने लगी.''
देश के पूर्व आर्थिक सलाहकार ने पहली बार नोटबंदी पर अपनी चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने अपनी किताब 'ऑफ काउंसेल: द चैलेंजेस ऑफ द मोदी-जेटली इकोनॉमी' में नोटबंदी समेत अर्थव्यवस्था के कई मुद्दों पर अपनी बात रखी है. हालांकि उन्होंने अपनी किताब में इस सवाल का जवाब नहीं दिया कि नोटबंदी की घोषणा से पहले इसकी जानकारी उन्हें दी गई थी या नहीं.
अरविंद सुब्रह्मण्यन अपनी किताब में लिखते हैं, ''नोटबंदी अर्थव्यवस्था को एक तगड़ा और खतरनाक झटका था. इस एक कदम से चलन में 86 फीसदी मुद्रा बाहर निकाल दी गई थी. नोटबंदी का असर रियल जीडीपी पर देखने को मिला.'' अरविंद कहते हैं कि इकोनॉमी की रफ्तार वैसे पहले से ही धीमी थी. लेकिन नोटबंदी के बाद यह और भी तेजी से गिरने लगी.''
अरविंद ने किताब में लिखा कि नोटबंदी से पहले की 6 तिमाही में अर्थव्यवस्था की रफ्तार 8 फीसदी की दर से थी. नोटबंदी के बाद की बात करें, तो इसके बाद 7 तिमाही में इकोनॉमी की रफ्तार घटी और यह 6.8 फीसदी पर आ गई.
देश के पूर्व आर्थिक सलाहकार लिखते हैं कि नोटबंदी की वजह से इकोनॉमी की रफ्तार धीमी हुई, इससे कोई इनकार नहीं कर सकता. इसकी बजाय बहस इसके असर पर हुई है. कि क्या इसका असर 2 फीसदी अंक था या उससे भी कम.
वह कहते हैं कि सिर्फ नोटबंदी ही नहीं, इस दौरान अन्य कई चीजों ने भी इकोनॉमी के ग्रोथ को प्रभावित किया. इसमें ब्याज दरें, जीएसटी लागू होना और तेल की बढ़ती कीमतें भी शामिल थीं.
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी की घोषणा की थी. इस घोषणा के बाद 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट चलन से बाहर हो गए थे.
मध्य प्रदेश और मिजोरम में मतदान काफी उत्साहजनक रहा है. दोनों राज्यों में बंपर वोटिंग दर्ज की गई. मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में ईवीएम में शिकायतों के बीच 74 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ, जिसे लेकर कांग्रेस काफी गदगद नजर आ रही है.
वोटिंग समाप्त होने के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने ज्यादा मतदान को कांग्रेस के पक्ष में बताया. उन्होंने कहा, 'मैंने पहले कहा था कि हम 140 से ज्यादा सीटें जीतेंगे, लेकिन आज की वोटिंग देखकर लग रहा है कि नतीजे और भी ज्यादा चौंकाने वाले रहेंगे.'
'शांति से निपटे चुनाव और बीजेपी'
इसके साथ ही कमलनाथ ने चुटकी लेते हुए भारतीय जनता पार्टी पर तंज भी कसा. उन्होंने कहा, 'आज के चुनाव की खासियत ये है कि दो चीजें शांति से निपट गईं, एक तो चुनाव और दूसरा बीजेपी.'
बुधवार को राज्य की सभी 230 सीटों पर शांतिपूर्ण तरीके से मतदान संपन्न हुआ. हालांकि, इस दौरान ईवीएम में खराबी की 800 से ज्यादा शिकायतें भी मिलीं. ईवीएम में सबसे ज्यादा शिकायत ग्वालियर, इंदौर, खरगौन और भिंड में सामने आई. भोपाल में ईवीएम खराब होने पर कांग्रेस ने प्रदर्शन भी किया और नेता धरने पर बैठ गए. इसके अलावा भिंड विधानसभा के पोलिंग बूथ नंबर-109 में उपद्रवियों ने फायरिंग की और पोलिंग एजेंट पर हमला किया.
देश के पूर्व आर्थिक सलाहकार ने पहली बार नोटबंदी पर अपनी चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने अपनी किताब 'ऑफ काउंसेल: द चैलेंजेस ऑफ द मोदी-जेटली इकोनॉमी' में नोटबंदी समेत अर्थव्यवस्था के कई मुद्दों पर अपनी बात रखी है. हालांकि उन्होंने अपनी किताब में इस सवाल का जवाब नहीं दिया कि नोटबंदी की घोषणा से पहले इसकी जानकारी उन्हें दी गई थी या नहीं.
अरविंद सुब्रह्मण्यन अपनी किताब में लिखते हैं, ''नोटबंदी अर्थव्यवस्था को एक तगड़ा और खतरनाक झटका था. इस एक कदम से चलन में 86 फीसदी मुद्रा बाहर निकाल दी गई थी. नोटबंदी का असर रियल जीडीपी पर देखने को मिला.'' अरविंद कहते हैं कि इकोनॉमी की रफ्तार वैसे पहले से ही धीमी थी. लेकिन नोटबंदी के बाद यह और भी तेजी से गिरने लगी.''
अरविंद ने किताब में लिखा कि नोटबंदी से पहले की 6 तिमाही में अर्थव्यवस्था की रफ्तार 8 फीसदी की दर से थी. नोटबंदी के बाद की बात करें, तो इसके बाद 7 तिमाही में इकोनॉमी की रफ्तार घटी और यह 6.8 फीसदी पर आ गई.
देश के पूर्व आर्थिक सलाहकार लिखते हैं कि नोटबंदी की वजह से इकोनॉमी की रफ्तार धीमी हुई, इससे कोई इनकार नहीं कर सकता. इसकी बजाय बहस इसके असर पर हुई है. कि क्या इसका असर 2 फीसदी अंक था या उससे भी कम.
वह कहते हैं कि सिर्फ नोटबंदी ही नहीं, इस दौरान अन्य कई चीजों ने भी इकोनॉमी के ग्रोथ को प्रभावित किया. इसमें ब्याज दरें, जीएसटी लागू होना और तेल की बढ़ती कीमतें भी शामिल थीं.
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी की घोषणा की थी. इस घोषणा के बाद 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट चलन से बाहर हो गए थे.
मध्य प्रदेश और मिजोरम में मतदान काफी उत्साहजनक रहा है. दोनों राज्यों में बंपर वोटिंग दर्ज की गई. मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में ईवीएम में शिकायतों के बीच 74 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ, जिसे लेकर कांग्रेस काफी गदगद नजर आ रही है.
वोटिंग समाप्त होने के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने ज्यादा मतदान को कांग्रेस के पक्ष में बताया. उन्होंने कहा, 'मैंने पहले कहा था कि हम 140 से ज्यादा सीटें जीतेंगे, लेकिन आज की वोटिंग देखकर लग रहा है कि नतीजे और भी ज्यादा चौंकाने वाले रहेंगे.'
'शांति से निपटे चुनाव और बीजेपी'
इसके साथ ही कमलनाथ ने चुटकी लेते हुए भारतीय जनता पार्टी पर तंज भी कसा. उन्होंने कहा, 'आज के चुनाव की खासियत ये है कि दो चीजें शांति से निपट गईं, एक तो चुनाव और दूसरा बीजेपी.'
बुधवार को राज्य की सभी 230 सीटों पर शांतिपूर्ण तरीके से मतदान संपन्न हुआ. हालांकि, इस दौरान ईवीएम में खराबी की 800 से ज्यादा शिकायतें भी मिलीं. ईवीएम में सबसे ज्यादा शिकायत ग्वालियर, इंदौर, खरगौन और भिंड में सामने आई. भोपाल में ईवीएम खराब होने पर कांग्रेस ने प्रदर्शन भी किया और नेता धरने पर बैठ गए. इसके अलावा भिंड विधानसभा के पोलिंग बूथ नंबर-109 में उपद्रवियों ने फायरिंग की और पोलिंग एजेंट पर हमला किया.
Tuesday, October 30, 2018
होमी जहाँगीर भाभा ना होते तो कैसा होता भारत?
अक्सर डबल ब्रेस्ट सूट पहनने वाले भाभा की वैज्ञानिक विषयों के साथ-साथ संगीत, नृत्य, पुस्तकों और चित्रकला में बराबर की रुचि थी. वैज्ञानिकों को भाषण देते हुए तो आपने देखा होगा लेकिन अपने साथियों का पोर्ट्रेट या स्केच बनाते हुए शायद नहीं.
आर्काइवल रिसोर्सेज़ फ़ॉर कंटेम्परेरी हिस्ट्री की संस्थापक और भाभा पर किताब लिखने वाली इंदिरा चौधरी कहती हैं, "मृणालिनी साराबाई ने मुझे बताया था कि भाभा ने उनके दो स्केच बनाए थे. यहां तक कि हुसैन का भी स्केच भाभा ने बनाया था.''
''जब हुसैन की पहली प्रदर्शनी मुम्बई में हुई थी तो भाभा ने ही उसका उद्घाटन किया था. जब भी बॉम्बे प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट्स की प्रदर्शनी होती थी तो भाभा ज़रूर आते थे और वहां से अपनी संस्था के लिए पेंटिंग्स और मूर्तियां ख़रीदते थे."
संगीत प्रेमी
जाने-माने वैज्ञानिक प्रोफ़ेसर यशपाल ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़ंडामेंटल रिसर्च में अपने करियर के शुरू के दिनों में होमी भाभा के साथ काम किया था. उन्होंने कहा था कि 57 साल की छोटी सी उम्र में भाभा ने जितना कुछ हासिल किया, उसका दूसरा कोई उदाहरण नहीं मिलता.
यशपाल ने बताया था, "संगीत में उनकी बहुत रुचि थी... चाहे वो भारतीय संगीत हो या पश्चिमी शास्त्रीय संगीत. किस पेंटिंग को कहां टांगा जाए और कैसे टांगा जाए.. फ़र्नीचर कैसा बनना है.. हर चीज़ के बारे में बहुत गहराई से वह सोचते थे. टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ फ़ंडामेंटल रिसर्च में हर बुधवार को एकेडमिक कॉन्फ्रेंस होती थी और भाभा ने शायद ही कोई कोलोकियम (एकेडमिक कॉन्फ्रेंस) मिस किया हो. इस दौरान वह सबसे मिलते थे और जानने की कोशिश करते थे कि क्या हो रहा है और क्या नहीं हो रहा है."
होमी भाभा जवाहरलाल नेहरू के काफ़ी नज़दीक थे और दुनिया के उन चुनिंदा लोगों में से थे जो उन्हें भाई कहकर पुकारते थे.
इंदिरा चौधरी कहती हैं, "नेहरू को सिर्फ़ दो लोग भाई कहते थे... एक थे जयप्रकाश नारायण और दूसरे होमी भाभा. हमारे आर्काइव में इंदिरा गांधी का एक भाषण है जिसमें वह कहती हैं कि नेहरू को भाभा अक्सर देर रात में फ़ोन करते थे और नेहरू हमेशा उनसे बात करने के लिए समय निकालते थे. एक अंग्रेज़ वैज्ञानिक थे पैट्रिक बैंकेट जो डीआरडीओ के सलाहकार होते थे... उनका कहना था कि नेहरू को बौद्धिक कंपनी बहुत पसंद थी और होमी भाभा से वह कंपनी उन्हें मिला करती थी."
भाभा का सोचने का दाएरा काफ़ी विस्तृत था. वो वर्तमान के साथ-साथ आने वाले समय की ज़रूरतों को भी उतना ही महत्व देते थे.
आगे की सोच
जाने-माने वैज्ञानिक प्रोफ़ेसर एमजीके मेनन एक दिलचस्प क़िस्सा सुनाया करते थे, "एक बार मैं उनके साथ देहरादून गया था. उस समय पंडित नेहरू वहाँ रुके हुए थे. एक बार हम सर्किट हाउस के भवन से निकलकर उसके ड्राइव वे पर चलने लगे. उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या आप इस ड्राइव वे के दोनों तरफ़ लगे पेड़ों को पहचानते हैं. मैंने कहा इनका नाम स्टरफ़ूलिया अमाटा है."
प्रोफ़ेसर मेनन ने बताया था, "भाभा बोले मैं इसी तरह के पेड़ ट्रॉम्बे के अपने सेंट्रल एवेन्यू में लगाने वाला हूँ. मैंने कहा होमी आपको पता है इन पेड़ों को बड़ा होने में कितना समय लगता है. उन्होंने पूछा कितना? मैंने कहा कम से कम सौ साल. उन्होंने कहा इससे क्या मतलब. हम नहीं रहेंगे. तुम नहीं रहोगे लेकिन वृक्ष तो रहेंगे और आने वाले लोग इन्हें देखेंगे जैसे हम इस सर्किट हाउस में इन पेड़ों को देख रहे हैं. मुझे ये देखकर बहुत अच्छा लगा कि वो आगे के बारे में सोच रहे थे न कि अपने लिए."
आर्काइवल रिसोर्सेज़ फ़ॉर कंटेम्परेरी हिस्ट्री की संस्थापक और भाभा पर किताब लिखने वाली इंदिरा चौधरी कहती हैं, "मृणालिनी साराबाई ने मुझे बताया था कि भाभा ने उनके दो स्केच बनाए थे. यहां तक कि हुसैन का भी स्केच भाभा ने बनाया था.''
''जब हुसैन की पहली प्रदर्शनी मुम्बई में हुई थी तो भाभा ने ही उसका उद्घाटन किया था. जब भी बॉम्बे प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट्स की प्रदर्शनी होती थी तो भाभा ज़रूर आते थे और वहां से अपनी संस्था के लिए पेंटिंग्स और मूर्तियां ख़रीदते थे."
संगीत प्रेमी
जाने-माने वैज्ञानिक प्रोफ़ेसर यशपाल ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़ंडामेंटल रिसर्च में अपने करियर के शुरू के दिनों में होमी भाभा के साथ काम किया था. उन्होंने कहा था कि 57 साल की छोटी सी उम्र में भाभा ने जितना कुछ हासिल किया, उसका दूसरा कोई उदाहरण नहीं मिलता.
यशपाल ने बताया था, "संगीत में उनकी बहुत रुचि थी... चाहे वो भारतीय संगीत हो या पश्चिमी शास्त्रीय संगीत. किस पेंटिंग को कहां टांगा जाए और कैसे टांगा जाए.. फ़र्नीचर कैसा बनना है.. हर चीज़ के बारे में बहुत गहराई से वह सोचते थे. टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ फ़ंडामेंटल रिसर्च में हर बुधवार को एकेडमिक कॉन्फ्रेंस होती थी और भाभा ने शायद ही कोई कोलोकियम (एकेडमिक कॉन्फ्रेंस) मिस किया हो. इस दौरान वह सबसे मिलते थे और जानने की कोशिश करते थे कि क्या हो रहा है और क्या नहीं हो रहा है."
होमी भाभा जवाहरलाल नेहरू के काफ़ी नज़दीक थे और दुनिया के उन चुनिंदा लोगों में से थे जो उन्हें भाई कहकर पुकारते थे.
इंदिरा चौधरी कहती हैं, "नेहरू को सिर्फ़ दो लोग भाई कहते थे... एक थे जयप्रकाश नारायण और दूसरे होमी भाभा. हमारे आर्काइव में इंदिरा गांधी का एक भाषण है जिसमें वह कहती हैं कि नेहरू को भाभा अक्सर देर रात में फ़ोन करते थे और नेहरू हमेशा उनसे बात करने के लिए समय निकालते थे. एक अंग्रेज़ वैज्ञानिक थे पैट्रिक बैंकेट जो डीआरडीओ के सलाहकार होते थे... उनका कहना था कि नेहरू को बौद्धिक कंपनी बहुत पसंद थी और होमी भाभा से वह कंपनी उन्हें मिला करती थी."
भाभा का सोचने का दाएरा काफ़ी विस्तृत था. वो वर्तमान के साथ-साथ आने वाले समय की ज़रूरतों को भी उतना ही महत्व देते थे.
आगे की सोच
जाने-माने वैज्ञानिक प्रोफ़ेसर एमजीके मेनन एक दिलचस्प क़िस्सा सुनाया करते थे, "एक बार मैं उनके साथ देहरादून गया था. उस समय पंडित नेहरू वहाँ रुके हुए थे. एक बार हम सर्किट हाउस के भवन से निकलकर उसके ड्राइव वे पर चलने लगे. उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या आप इस ड्राइव वे के दोनों तरफ़ लगे पेड़ों को पहचानते हैं. मैंने कहा इनका नाम स्टरफ़ूलिया अमाटा है."
प्रोफ़ेसर मेनन ने बताया था, "भाभा बोले मैं इसी तरह के पेड़ ट्रॉम्बे के अपने सेंट्रल एवेन्यू में लगाने वाला हूँ. मैंने कहा होमी आपको पता है इन पेड़ों को बड़ा होने में कितना समय लगता है. उन्होंने पूछा कितना? मैंने कहा कम से कम सौ साल. उन्होंने कहा इससे क्या मतलब. हम नहीं रहेंगे. तुम नहीं रहोगे लेकिन वृक्ष तो रहेंगे और आने वाले लोग इन्हें देखेंगे जैसे हम इस सर्किट हाउस में इन पेड़ों को देख रहे हैं. मुझे ये देखकर बहुत अच्छा लगा कि वो आगे के बारे में सोच रहे थे न कि अपने लिए."
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